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हिंदू त्योहार तिथियां

पंचांग से खगोलीय रूप से गणना की गई — किसी भी त्योहार पर टैप करें और उसकी सटीक तिथि व दिन का विवरण देखें।

प्रमुख त्योहार व व्रत

दिवाली 08 नव. 2026

दिवाली, रोशनी का त्योहार, कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जब रात में दीपक जलाए जाते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह पाँच दिनों की श्रृंखला का केंद्र है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होती है, और इसकी तिथि हर साल चंद्र कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है।

लक्ष्मी पूजा 08 नव. 2026

लक्ष्मी पूजा दिवाली की रात प्रदोष काल में की जाती है, जब देवी लक्ष्मी को साफ-सुथरे और रोशनी से सजे घरों में आमंत्रित किया जाता है। पूजा का मुहूर्त अमावस्या तिथि और स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए तिथि जितना ही समय भी महत्वपूर्ण है।

धनतेरस 06 नव. 2026

धनतेरस — धनत्रयोदशी — कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को दिवाली उत्सव का शुभारंभ करती है। यह सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने तथा स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का पारंपरिक दिन है।

करवा चौथ 29 अक्टू. 2026

करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है, जब विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है, इसलिए उस दिन का चंद्रोदय समय इस व्रत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

छठ पूजा 15 नव. 2026

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का महान सूर्य-उपासना पर्व छठ पूजा, कार्तिक मास की शुक्ल षष्ठी को सूर्य और छठी मैया को समर्पित है। श्रद्धालु 36 घंटे का कठोर व्रत रखते हैं और अस्ताचलगामी तथा उदीयमान, दोनों सूर्यों को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टू. 2026

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ होती है और नौ रातों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इसका समापन दुर्गा अष्टमी, महा नवमी और विजयादशमी के साथ होता है।

दुर्गा अष्टमी 19 अक्टू. 2026

दुर्गा अष्टमी, शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन, देवी दुर्गा की पूजा का सबसे गहन दिन है, जो संधि पूजा और कन्या पूजन द्वारा चिह्नित होता है। कई साधक इस दिन उपवास रखते हैं और देवी को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

दशहरा (विजयादशमी) 20 अक्टू. 2026

विजयादशमी — दशहरा — असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है: राम की रावण पर विजय और दुर्गा की महिषासुर पर विजय। नवरात्रि के पश्चात आने वाली दशमी तिथि को पड़ने वाला यह दिन नए कार्यों के आरंभ, शस्त्र पूजा और विद्यारंभ के लिए एक श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।

होली 21 मार्च 2027

रंगों का पर्व होली, फाल्गुन की पूर्णिमा को होलिका दहन के पश्चात मनाई जाती है। यह अग्नि-रात्रि प्रह्लाद की होलिका से रक्षा की स्मृति में मनाई जाती है, और अगली सुबह रंगों की बौछार के साथ शीत ऋतु औपचारिक रूप से वसंत ऋतु को अपना स्थान दे देती है।

महाशिवरात्रि 06 मार्च 2027

महाशिवरात्रि, शिव की महान रात्रि, फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, जिसमें रात्रि-जागरण, उपवास और चारों प्रहरों में रुद्राभिषेक किया जाता है। शिव वास और निशीथ काल के समय इस व्रत के लिए पंचांग को आवश्यक बनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी 04 सित. 2026

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के मध्यरात्रि जन्म का उत्सव है, जो भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाता है। व्रत का पारण निशीथ-काल पूजा के बाद किया जाता है, इसलिए तिथि और नक्षत्र दोनों के समय इस व्रत के पालन को निर्धारित करते हैं।

रक्षाबंधन 28 अग. 2026

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। परंपरा के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित है, इसलिए उस दिन भद्रा के समाप्त होने का समय ही मुख्य मुहूर्त विवरण होता है।

हनुमान जयंती 20 अप्रै. 2027

हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को भगवान हनुमान के जन्म का उत्सव है। भक्त सूर्योदय से हनुमान चालीसा का पाठ, सिंदूर अर्पण और हनुमान मंदिरों में दर्शन करके यह दिन मनाते हैं।

अक्षय तृतीया 09 मई 2027

वैशाख मास की शुक्ल तृतीया को पड़ने वाली अक्षय तृतीया उन दुर्लभ स्वयंसिद्ध मुहूर्तों में से एक है — जो बिना पंचांग शुद्धि के भी पूरे दिन शुभ रहता है। यह सोना खरीदने और अक्षय वृद्धि के लिए नए कार्यों की शुरुआत करने का पारंपरिक दिन है।

वसंत पंचमी 11 फ़र. 2027

माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली वसंत पंचमी माँ सरस्वती को समर्पित है। यह विद्यारंभ — बच्चे की पहली अक्षर-शिक्षा — के लिए प्रिय दिन है और उनके सम्मान में पीले वस्त्र धारण करके वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।

नाग पंचमी 17 अग. 2026

श्रावण की शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली नाग पंचमी नाग देवताओं को समर्पित है। परिवार की सुरक्षा के लिए नाग देवताओं को दूध और हल्दी अर्पित की जाती है, और यह काल सर्प दोष के उपायों के लिए एक प्रमुख दिन है।

उगादी 07 अप्रै. 2027

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का चंद्र नववर्ष उगादी, चैत्र की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। घरों में नए संवत्सर का स्वागत उगादी पच्चड़ी से किया जाता है — आने वाले वर्ष के छह स्वादों के लिए छह रस।

गुड़ी पड़वा 07 अप्रै. 2027

महाराष्ट्र का नववर्ष गुड़ी पड़वा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को उगादी के साथ ही मनाया जाता है। गुड़ी — बांस के डंडे पर बना रेशमी ध्वज, जिसके ऊपर उल्टा कलश रखा जाता है — विजय और समृद्धि के आह्वान हेतु सूर्योदय के समय द्वार पर फहराई जाती है।

एकादशी व्रत तिथियाँ 23 अग. 2026

एकादशी, प्रत्येक चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, प्रमुख वैष्णव व्रत दिवस है — वर्ष में चौबीस (या उससे अधिक) बार आती है, और हर एक का अपना नाम और कथा होती है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक एकादशी की तिथि खगोलीय गणना के आधार पर सूचीबद्ध की गई है।

प्रदोष व्रत तिथियाँ 25 अग. 2026

प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, और सूर्यास्त के ठीक बाद प्रदोष काल में पूजा की जाती है। सोमवार (सोम), मंगलवार (भौम) या शनिवार (शनि) को पड़ने वाले प्रदोष का विशेष महत्व होता है।

संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ 31 अग. 2026

संकष्टी चतुर्थी, प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण चतुर्थी, भगवान गणेश का विघ्नहर्ता व्रत है, जिसे चंद्रोदय के बाद खोला जाता है। हर महीने की संकष्टी का अपना नाम होता है; मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारकी — सबसे अधिक शुभ मानी जाती है।

आने वाले — अगले 90 दिन

दिनांक भारत (IST) के लिए अमांत गणना के अनुसार दिए गए हैं। क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है — तिथि के सही समय के लिए दिन का पंचांग देखें।