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करवा चौथ 2026 तिथि

करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है, जब विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है, इसलिए उस दिन का चंद्रोदय समय इस व्रत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

करवा चौथ 2026

गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

इस दिन का पूर्ण पंचांग देखें →

हिंदू परंपराओं में करवा चौथ

करवा चौथ एक हिंदू त्योहार है जिसमें विवाहित महिलाएँ परंपरागत रूप से अपने पतियों की कुशलता और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। यह कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) मास में, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।

उत्तर भारत, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में, यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर व्रत रखती हैं और अपने पतियों की कुशलता तथा वैवाहिक सुख के लिए प्रार्थना करती हैं।

रानी वीरावती की कथा

कथा के अनुसार, रानी वीरावती ने करवा चौथ का व्रत रखा, जिससे भूख के कारण वह बेहोश हो गईं। उनके भाइयों ने उन्हें छल से समय से पहले व्रत तुड़वा दिया, जिससे उनके पति पर संकट आ गया। व्रत के प्रति उनकी नई निष्ठा के कारण यमराज ने उनके पति को पुनर्जीवित कर दिया, जो करवा चौथ की शक्ति को दर्शाता है।

प्रार्थना और यमराज के प्रति भक्ति के माध्यम से, एक समर्पित पत्नी करवा ने अपने पति को मगरमच्छ के हमले से बचाया। यह कथा दर्शाती है कि पत्नी का प्रेम और समर्पण कितना सुरक्षात्मक हो सकता है।

कथा के अनुसार द्रौपदी ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से प्रार्थना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखा था।

1. उपवास और भक्ति

  • महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं, जो अपने पतियों के प्रति उनकी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है।
  • 2. करवा चौथ पूजा और अनुष्ठान

  • शाम को महिलाएँ एकत्र होकर पूजा करती हैं, करवा चौथ की कथा सुनती हैं, और देवी पार्वती, भगवान शिव तथा भगवान गणेश की आराधना करती हैं।
  • वे करवा (मिट्टी का छोटा पात्र), सिंदूर, चूड़ियाँ और मिठाइयों से पूजा करती हैं।
  • 3. चंद्रोदय अनुष्ठान और व्रत खोलना

  • महिलाएँ छलनी से चाँद देखती हैं, चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करती हैं, और व्रत तोड़ने से पहले छलनी के माध्यम से अपने पति का चेहरा देखती हैं।
  • पति अपनी पत्नी को जल और भोजन देकर अपनी देखभाल और प्रेम को व्यक्त करता है।
  • 4. पारंपरिक वेशभूषा धारण करना

  • महिलाएँ लाल या दुल्हन जैसी साड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, और आभूषणों से सुसज्जित होकर वैवाहिक सुख का प्रतीक प्रस्तुत करती हैं।
  • करवा चौथ सभी विवाहित जोड़ों के जीवन में प्रेम, आनंद और समृद्धि लेकर आए! 🙏🌙

    करवा चौथ 2026

    करवा चौथ 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।