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Kaal Bhairav Jayanti 2026 तिथि

Kaal Bhairav Jayanti 2026

मंगलवार, 01 दिसम्बर 2026

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काल भैरव जयंती का महत्व

काल भैरव जयंती, जिसे महाकाल भैरव अष्टमी भी कहा जाता है, भगवान काल भैरव को समर्पित हिंदू पर्व है, जो शिव के एक शक्तिशाली स्वरूप हैं। यह मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर) मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाती है।

भगवान काल भैरव को धर्म का रक्षक, समय के संरक्षक और बुराई के संहारक के रूप में देखा जाता है। लोग सुरक्षा, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उनकी आराधना करते हैं।

काल भैरव का जन्म

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार काल भैरव की उत्पत्ति शिव के क्रोध से हुई, जो ब्रह्मा के अहंकार को दंडित करने के लिए था। ब्रह्मा को उनके अत्यधिक अभिमान के लिए दंडित करने हेतु शिव ने काल भैरव को उत्पन्न किया; उन्होंने ब्रह्मा का सिर काट दिया, उनके पांच सिरों में से एक को हटाकर अहंकार और मिथ्या ज्ञान के नाश का प्रतीक बनाया। इस प्रकार काल भैरव समय के पूजनीय संरक्षक और सभी शिव मंदिरों के रक्षक बने।

समय (काल) के स्वामी के रूप में पूजित, वे भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और धार्मिक जीवन के लिए अपने समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हैं। विशेष रूप से वाराणसी शहर उन्हें अपना संरक्षक देवता मानता है; वहां माना जाता है कि वे भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।

लोगों का विश्वास है कि इस जयंती पर काल भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं, बाधाएं समाप्त होती हैं, और प्रतिकूल ग्रह स्थितियों का प्रभाव कम होता है। भक्त उनसे साहस, बुद्धि और भय पर विजय जैसे आशीर्वाद मांगते हैं।

1. उपवास और भक्ति

  • भक्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखते हैं, नकारात्मक प्रभावों से काल भैरव की सुरक्षा की कामना करते हुए।
  • 2. विशेष पूजा और अर्पण

  • भगवान काल भैरव की पूजा सरसों के तेल, काले तिल, फूलों और विशेष भोग से की जाती है।
  • काल भैरव को अत्यंत प्रिय माने जाने वाले कुत्तों को भक्ति भाव से भोजन कराया जाता है।
  • 3. मंत्र जाप और शास्त्र पाठ

  • भक्त दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए काल भैरव अष्टकम, शिव स्तोत्र और ॐ काल भैरवाय नमः का जाप करते हैं।
  • 4. काल भैरव मंदिरों के दर्शन

  • तीर्थयात्री उनकी दिव्य सुरक्षा और कृपा प्राप्त करने के लिए काल भैरव मंदिरों, विशेष रूप से वाराणसी में, दर्शन के लिए जाते हैं।
  • भगवान काल भैरव सभी को सुरक्षा, बुद्धि और निर्भयता का आशीर्वाद दें! 🙏🕉️

    Kaal Bhairav Jayanti 2026

    काल भैरव जयंती
    मंगल, 01 दिस. 2026

    Kaal Bhairav Jayanti 2027

    काल भैरव जयंती
    रवि, 21 नव. 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।