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Agrahayana Purnima 2026 तिथि

Agrahayana Purnima 2026

बुधवार, 23 दिसम्बर 2026

इस दिन का पूर्ण पंचांग देखें →

अग्रहायण पूर्णिमा का महत्व

अग्रहायण पूर्णिमा, जिसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू माह अग्रहायण या मार्गशीर्ष की पूर्णिमा है, जो नवंबर या दिसंबर में पड़ती है। हिंदू परंपरा में, यह शुभ दिन आध्यात्मिक उन्नति, धर्मपरायणता और परोपकार के कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण पूजा करना, और धार्मिक तपस्या इस अवसर पर विशेष रूप से प्रचलित और आदरणीय प्रथाएं हैं।

हिंदू शास्त्रों में पवित्र माना गया मार्गशीर्ष मास, जिसका उल्लेख भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में किया है, इसी पूर्णिमा से आरंभ होता है। "बारह महीनों में, मैं मार्गशीर्ष हूं।" इसी कारण अग्रहायण पूर्णिमा को आध्यात्मिक साधना, दान और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आदर्श दिन माना जाता है।

भगवान विष्णु की पूजा – सत्यनारायण पूजा

इस दिन कई हिंदू परिवार सत्यनारायण पूजा मनाते हुए समृद्धि, सुख और दिव्य कृपा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं। भक्ति और सत्य की महिमा बताने वाली सत्यनारायण कथा सुनाई जाती है।

भगवद्गीता और वैदिक परंपराओं में महत्व

भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में मार्गशीर्ष मास के आध्यात्मिक महत्व की प्रशंसा की है। अग्रहायण पूर्णिमा नई आध्यात्मिक साधनाएं आरंभ करने, विष्णु सहस्रनाम का जाप करने और दिव्य सत्यों पर ध्यान करने के लिए आदर्श दिन है। अग्रहायण पूर्णिमा पर विष्णु सहस्रनाम जाप और ईश्वर के ध्यान सहित नई आध्यात्मिक साधनाएं आरंभ करना उत्तम माना जाता है।

पवित्र स्नान और धार्मिक दान

ऐसा माना जाता है कि गंगा, यमुना और गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। दान को अत्यंत शुभ माना जाता है, और लोग जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दान करते हैं।

दत्तात्रेय जयंती

कुछ क्षेत्रों में अग्रहायण पूर्णिमा दत्तात्रेय जयंती के साथ मेल खाती है, जो भगवान दत्तात्रेय के जन्म का स्मरण कराती है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर का संयुक्त अवतार हैं। भक्त दत्तात्रेय मंदिरों में जाते हैं, व्रत रखते हैं, और दूध, फूल तथा विशेष प्रार्थनाएं अर्पित करते हैं।

ॐ नमो नारायणाय! 🙏

Agrahayana Purnima 2026

अगहन पूर्णिमा
बुध, 23 दिस. 2026

Agrahayana Purnima 2027

अगहन पूर्णिमा
सोम, 13 दिस. 2027

तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।