चंपा षष्ठी का महत्व
महाराष्ट्र और कर्नाटक में, भगवान शिव के पूजनीय स्वरूप भगवान खंडोबा, हिंदू पर्व चंपा षष्ठी के केंद्र बिंदु हैं। मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर) के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शुक्ल पक्ष के दौरान मनाया जाता है। इस पर्व में भगवान खंडोबा की राक्षसों मणि और मल्ल पर विजय का स्मरण किया जाता है, जो असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।
चंपा षष्ठी पर भक्तगण उपवास, प्रार्थना और शोभायात्राओं के माध्यम से दैवीय संरक्षण, शक्ति और भौतिक समृद्धि की कामना करते हैं।
भगवान खंडोबा की विजय की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, दो राक्षसों मणि और मल्ल ने देवताओं को त्रस्त कर संसार में आतंक फैला दिया था। देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की, और उन्होंने उग्र खंडोबा (मार्तंड भैरव) के रूप में अवतार लेकर युद्ध में प्रवेश किया।
छह दिनों के भीषण संघर्ष के बाद, खंडोबा ने चंपा षष्ठी के दिन राक्षसों का वध किया। मृत्यु के समक्ष, मणि और मल्ल ने देवता के समक्ष समर्पण कर दिया, और उनकी सेवा अहंकार तथा माया के नाश का प्रतीक बनी।
भगवान खंडोबा, एक रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते हुए, महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य क्षेत्रों में भक्तों की बुराई से रक्षा करते हैं। उनके चित्रण में प्रायः वे अश्वारूढ़, शस्त्रधारी और म्हाल्सा तथा बाणाई के साथ दिखाए जाते हैं, जो दैवीय शक्ति और न्याय के प्रतीक हैं।
1. उपवास और भक्ति प्रार्थनाएँ
2. जेजुरी मंदिर में भव्य उत्सव
3. सामुदायिक भोज और नैवेद्य
भगवान खंडोबा सभी को शक्ति, बुद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद दें! 🙏⚔️🕉️