हिंदू परंपराओं में चैती छठ पूजा
छठ पूजा के महत्वपूर्ण हिंदू पर्व में सूर्य देव और सुख-समृद्धि तथा संतानोत्पत्ति की देवी छठी मैया की पूजा की जाती है। इसका मुख्य रूप से आयोजन बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में होता है। अक्टूबर-नवंबर में मनाई जाने वाली कार्तिक छठ के विपरीत, चैती छठ हिंदू नववर्ष के आरंभ, अर्थात चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में मनाई जाती है।
छठ पूजा एक अत्यंत श्रद्धामय पर्व है, जिसमें व्रत, पवित्र नदियों में स्नान, तथा उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व पवित्रता, कृतज्ञता और मानवता तथा प्रकृति के गहरे संबंध का उत्सव है।
सूर्य देव की उपासना
सूर्य देव को जीवन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि छठ पूजा के दौरान सूर्य देव की आराधना करने से उन्हें अच्छे स्वास्थ्य, सुख और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
छठी मैया की भूमिका
छठी मैया को संतानोत्पत्ति, मातृत्व और बच्चों की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। महिलाएं अपने परिवार के स्वास्थ्य और सुख, विशेष रूप से अपने बच्चों की भलाई और सफलता के लिए उनसे प्रार्थना करती हैं।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, महान योद्धा कर्ण सूर्य देव द्वारा कुंती को दिया गया वरदान था, जिन्होंने उनकी आराधना की थी। सूर्य देव के परम भक्त कर्ण, छठ पूजा से मिलते-जुलते अनुष्ठानों का पालन करते थे।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम और देवी सीता ने 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर छठ पूजा मनाई थी।
चैती छठ भी कार्तिक छठ की तरह ही चार दिवसीय अनुष्ठानिक क्रम का पालन करती है, जिसमें व्रत, नदी स्नान और प्रार्थनाएं शामिल हैं।
1. नहाय-खाय (प्रथम दिन)
2. लोहंडा और खरना (द्वितीय दिन)
3. संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन – सायं अर्घ्य)
4. उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन – प्रातःकालीन अर्घ्य)
सूर्य देव और छठी मैया सभी को शांति, समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद दें! 🙏🌞