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Shitala Ashtami 2027 तिथि

Shitala Ashtami 2027

मंगलवार, 30 मार्च 2027

इस दिन का पूर्ण पंचांग देखें →

शीतला अष्टमी का महत्व

देवी शीतला, जो उपचार, सुरक्षा और रोग निवारण की देवी हैं, को शीतला अष्टमी के हिंदू पर्व पर पूजा जाता है, जिसे बसौड़ा भी कहा जाता है। यह चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, होली के तुरंत बाद मनाया जाता है। यह त्योहार उत्तर भारत में व्यापक रूप से मनाया जाता है, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल विशेष रूप से उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

बीमारियों, विशेष रूप से चेचक, छोटी माता और त्वचा संक्रमण से स्वयं को बचाने के लिए भक्त देवी शीतला की पूजा करते हैं। यह त्योहार स्वच्छता, स्वास्थ्य और ताज़गी भरे भोजन के सेवन को बढ़ावा देता है।

देवी शीतला की भूमिका

ऐसा माना जाता है कि देवी शीतला देवी पार्वती या देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। चित्र में उन्हें गधे पर सवार, झाड़ू, ठंडे पानी का घड़ा और नीम की डाली लिए दिखाया गया है—जो उपचार और शुद्धिकरण के प्रतीक हैं। उन्हें महामारियों और मौसमी बीमारियों से रक्षक माना जाता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शीतला उन लोगों पर प्रसन्न होती हैं जो व्रत और स्वच्छता का पालन करते हैं। लोगों का मानना है कि इस दिन गर्म, ताज़ा पका हुआ भोजन करना अशुभ होता है, इसलिए भक्त एक दिन पहले भोजन तैयार करते हैं और उसे ठंडा करके खाते हैं (बसौड़ा प्रसाद)।

1. देवी शीतला की पूजा

  • भक्त शीतला मंदिरों में जाते हैं और देवी को हल्दी, नीम के पत्ते, दही और ठंडा पानी अर्पित करते हैं।
  • महिलाएं अपने परिवार की भलाई और बीमारियों से सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं।
  • 2. ठंडा भोजन करना (बसौड़ा परंपरा)

  • परिवार इस दिन खाना नहीं बनाते और पिछली रात बनाया गया बासी भोजन खाते हैं, यह मानते हुए कि इसका शीतल प्रभाव होता है और यह देवी को प्रसन्न करता है।
  • पारंपरिक व्यंजनों में बाजरे की रोटी, चावल, दही, हलवा जैसी मिठाइयाँ और अन्य कम मसालेदार भोजन शामिल हैं।
  • 3. स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए प्रार्थना

  • अच्छे स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए विशेष हवन (अग्नि अनुष्ठान) और दान किए जाते हैं।
  • अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध नीम के पत्ते और हल्दी का अनुष्ठानों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • देवी शीतला सभी को स्वास्थ्य, खुशी और बीमारियों से सुरक्षा का आशीर्वाद दें! 🙏🌿

    Shitala Ashtami 2026

    शीतला अष्टमी
    बुध, 11 मार्च 2026

    Shitala Ashtami 2027

    शीतला अष्टमी
    मंगल, 30 मार्च 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।