Web Analytics
FeelAstro feelastro

Ganga Saptami 2027 तिथि

Ganga Saptami 2027

बुधवार, 12 मई 2027

इस दिन का पूर्ण पंचांग देखें →

हिंदू परंपराओं में गंगा सप्तमी

गंगा सप्तमी और गंगा जयंती दोनों नामों से मनाया जाने वाला यह पवित्र हिंदू पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। यह वैशाख (अप्रैल-मई) माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ता है और एक महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन देवी गंगा के ऋषि जह्नु की कैद से मुक्त होने की स्मृति में मनाया जाता है, इसीलिए उनका एक अन्य नाम जाह्नवी भी है।

इस दिन भक्तों का विश्वास है कि गंगा नदी में स्नान और पूजन करने से आध्यात्मिक शुद्धि, पापों की क्षमा और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन पवित्र स्नान, पूजन और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

देवी गंगा का अवतरण

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा स्वर्गलोक (ब्रह्मलोक) से पृथ्वी पर राजा भगीरथ के पूर्वजों की आत्माओं को शुद्ध करने के लिए अवतरित हुई थीं। उनके प्रबल वेग से होने वाले विनाश को रोकने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा के प्रवाह को धीरे से नियंत्रित किया।

जब गंगा ऋषि जह्नु के आश्रम के पास से बहीं, तो इससे वे क्रोधित हो गए और क्रोधवश उन्होंने पूरी नदी को पी लिया। राजा भगीरथ की प्रार्थनाओं के फलस्वरूप ऋषि जह्नु ने उन्हें अपने कान से मुक्त किया, जिससे उनका नाम जाह्नवी—जह्नु की पुत्री—पड़ा। गंगा सप्तमी गंगा के नवजीवन और मानवता के कल्याण हेतु उनके निरंतर प्रवाह की स्मृति में मनाई जाती है।

हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नदी गंगा शुद्धता, मोक्ष और पापों के नाश की प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि इस नदी में स्नान करने से, विशेषकर गंगा सप्तमी के दिन, मोक्ष (मुक्ति) की प्राप्ति होती है और कर्मों के ऋण से मुक्ति मिलती है।

1. गंगा में पवित्र स्नान

  • भक्त सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में अनुष्ठानिक स्नान (गंगा स्नान) करते हैं, ऐसा माना जाता है कि इससे आत्मा शुद्ध होती है और पाप दूर होते हैं।
  • हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज और ऋषिकेश जैसे प्रमुख स्नान घाटों पर तीर्थयात्रियों की बड़ी भीड़ उमड़ती है।
  • 2. विशेष पूजा और आरती

  • देवी गंगा को समर्पित मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, हवन (अग्नि अनुष्ठान) और गंगा आरती की जाती है।
  • भक्त गंगा स्तोत्र और वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए नदी को फूल, दीपक और दूध अर्पित करते हैं।
  • 3. दान-पुण्य

  • गंगा सप्तमी के दिन दान करना और गरीबों की सहायता करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
  • भक्त ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, भोजन और जल दान करते हैं, जो पुण्य कर्म माने जाते हैं।
  • 4. शास्त्रों का पाठ और मंत्र जाप

  • अनेक भक्त गंगा सहस्रनाम (गंगा के 1000 नाम) का पाठ करते हैं और स्कंद पुराण तथा भागवत पुराण जैसे ग्रंथों को पढ़ते हैं, जिनमें गंगा के दिव्य अवतरण का वर्णन मिलता है।
  • 5. पितृ तर्पण के अनुष्ठान

  • चूंकि गंगा आत्माओं की मुक्ति से जुड़ी हैं, इसलिए लोग पितरों को मोक्ष प्राप्ति में सहायता हेतु पितृ तर्पण (पितरों को जल अर्पित करना) करते हैं।
  • मां गंगा का दिव्य जल हमारे हृदय, मन और आत्मा को शुद्ध करे! 🙏🌊

    Ganga Saptami 2026

    गंगा सप्तमी
    गुरू, 23 अप्रै. 2026

    Ganga Saptami 2027

    गंगा सप्तमी
    बुध, 12 मई 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।