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Balarama Jayanti 2027 तिथि

Balarama Jayanti 2027

सोमवार, 23 अगस्त 2027

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बलराम जयंती

भगवान कृष्ण के बड़े भाई और विष्णु के आठवें अवतार, भगवान बलराम के जन्म को हिंदू धर्म में बलराम जयंती के पवित्र पर्व के रूप में मनाया जाता है। भारत के अधिकांश हिस्सों में इसे श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त) के दिन मनाया जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसे अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) के दिन मनाया जाता है।

भगवान बलराम शक्ति, निष्ठा और कृषि समृद्धि के प्रतीक हैं। लोग उनकी शक्ति, ज्ञान और धर्मपूर्ण जीवनशैली के लिए उनकी पूजा करते हैं।

भगवान बलराम का जन्म

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, बलराम को देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में दैवीय शक्ति द्वारा स्थानांतरित किया गया था, इसलिए उन्हें संकर्षण (जिन्हें खींचा गया) भी कहा जाता है। उनका जन्म वसुदेव और देवकी के सातवें पुत्र के रूप में हुआ था और वे बाद में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बने।

रक्षक और मार्गदर्शक: भगवान बलराम अपनी शक्ति और ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कृष्ण का साथ देने और अनेक युद्धों में उन्हें मार्गदर्शन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कृषि के स्वामी: बलराम हल चलाने और खेती से भी जुड़े हैं, और उनकी कृषि और उर्वरता के देवता के रूप में पूजा की जाती है। धर्म का प्रतीक: जहाँ कृष्ण अपनी दिव्य लीलाओं (चंचल क्रियाओं) के लिए जाने जाते हैं, बलराम अनुशासन, नैतिकता और कर्तव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

1. व्रत और भक्ति

  • भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान बलराम की पूजा करने के बाद उसे तोड़ते हैं।
  • दूध, मक्खन और फल जैसे विशेष भोजन, जो बलराम के प्रिय थे, उन्हें अर्पित किए जाते हैं।
  • 2. पूजा और शास्त्र पाठ

  • मंदिरों और घरों में पूजा और भजन (भक्ति गीत) किए जाते हैं।
  • भक्तजन श्रीमद्भागवतम और विष्णु पुराण से कथाएं पढ़ते हैं, जो बलराम के गुणों को उजागर करती हैं।
  • 3. दान और गरीबों की सहायता

  • बलराम कृषि और पोषण से जुड़े हैं, इसलिए भक्तजन जरूरतमंदों को अन्न, भोजन और वस्त्र दान करते हैं।
  • उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति धर्म की रक्षा करने और ईमानदारी व भक्ति से जीवन जीने में है।

    भगवान बलराम सभी को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद दें! 🙏⚡

    Balarama Jayanti 2027

    बलराम जयंती
    सोम, 23 अग. 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।