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Shitala Saptami 2027 तिथि

Shitala Saptami 2027

सोमवार, 29 मार्च 2027

इस दिन का पूर्ण पंचांग देखें →

शीतला सप्तमी का महत्व

शीतला सप्तमी, एक हिंदू पर्व, के अवसर पर देवी शीतला की पूजा की जाती है, जो उपचार, सुरक्षा और रोगों की रोकथाम की देवी हैं। यह पर्व चैत्र (मार्च-अप्रैल) माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को, शीतला अष्टमी से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार उत्तर भारतीय राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल में प्रमुखता से मनाया जाता है।

लोग देवी शीतला की पूजा करके चेचक, छोटी माता, त्वचा रोगों और अन्य संक्रमणों से सुरक्षा की कामना करते हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य और ठंडे भोजन पर ध्यान देना भी इस पर्व के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

ऐसा माना जाता है कि देवी शीतला, जो दुर्गा या पार्वती का ही एक स्वरूप हैं, लोगों को रोगों के प्रकोप और मौसमी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। उनकी गधे की सवारी, हाथ में झाड़ू, ठंडे पानी का घड़ा और नीम की पत्तियाँ स्वच्छता और शुद्धिकरण का प्रतीक हैं।

शीतला सप्तमी का व्रत रखना एक हिंदू परंपरा है, जिसे रोगों से बचाव और परिवार के स्वास्थ्य व कल्याण को सुनिश्चित करने वाला माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि देवी शीतला की पूजा करने से गर्मी और खराब स्वच्छता से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है।

1. व्रत और पूजा

  • महिलाएँ अपने परिवार के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं और देवी शीतला से प्रार्थना करती हैं।
  • भक्त शीतला मंदिरों में जाकर हल्दी, नीम की पत्तियाँ और ठंडा पानी शुद्धिकरण और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में अर्पित करते हैं।
  • 2. ठंडा भोजन ग्रहण करना (बासोड़ा परंपरा)

  • एक विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत इस दिन भोजन नहीं पकाया जाता। इसके बजाय भक्त पिछली रात बना भोजन ग्रहण करते हैं, जिसे बासोड़ा प्रसाद कहा जाता है।
  • इसमें सामान्यतः दही, चावल, बाजरे की रोटी, मिठाइयाँ और अन्य ठंडे व्यंजन शामिल होते हैं।
  • 3. दान और स्वच्छता जागरूकता

  • भक्त धार्मिक पुण्य के रूप में गरीबों को भोजन, वस्त्र और धन दान करते हैं।
  • कई लोग बीमारियों से बचाव के लिए अपने आसपास की सफाई करते हैं और स्वच्छता को बढ़ावा देते हैं।
  • देवी शीतला सभी को रोगों से बचाएं और शांति व समृद्धि प्रदान करें! 🙏🌿

    Shitala Saptami 2026

    शीतला सप्तमी
    मंगल, 10 मार्च 2026

    Shitala Saptami 2027

    शीतला सप्तमी
    सोम, 29 मार्च 2027

    तिथियाँ खगोलीय गणना (अमांत गणना, IST, सायन/लाहिड़ी) के आधार पर तय की गई हैं — क्षेत्रीय पालन एक दिन इधर-उधर हो सकता है। किसी भी तिथि पर तिथि समाप्ति समय, मुहूर्त अवधि और चौघड़िया के लिए पंचांग कैलेंडर देखें।