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पुनर्फू (पुनर्भू) योग कैलकुलेटर

पुनर्फू (पुनर्भू) योग शनि और चंद्रमा की परस्पर ग्रंथि से बनता है। "पुनर्भू" का अर्थ है — फिर से होना। इस योग में कार्य एक बार में पूरे नहीं होते; निर्णय दोहराए जाते हैं, सगाई-विवाह जैसे मामलों में विशेष रूप से विलंब या पुनरावृत्ति देखी जाती है।

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पुनर्फू (पुनर्भू) योग कैलकुलेटर के बारे में

यह योग तीन स्थितियों में बनता है: शनि और चंद्रमा दोनों सप्तम भाव में हों; चंद्रमा शनि से सप्तम (आमने-सामने) हो; या शनि चंद्र-स्वामित्व के नक्षत्र (रोहिणी, हस्त, श्रवण) में हो और चंद्रमा शनि-स्वामित्व के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) में — अर्थात दोनों का नक्षत्र-विनिमय।

दक्षिण भारतीय परंपरा में विवाह-मिलान के समय पुनर्फू की जाँच का विशेष महत्व है। FeelAstro का कैलकुलेटर तीनों शर्तें जाँचकर बताता है कि योग किस रूप में बन रहा है, साथ ही शनि-चंद्र का बल-विश्लेषण भी देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुनर्फू योग क्या है?

शनि-चंद्रमा की युति, परस्पर दृष्टि या नक्षत्र-विनिमय से बनने वाला योग, जो कार्यों की पुनरावृत्ति और विलंब से जुड़ा है — विशेषकर विवाह और बड़े निर्णयों में। इसे पुनर्भू योग भी कहते हैं।

पुनर्फू योग विवाह को कैसे प्रभावित करता है?

परंपरा में इसे टूटी सगाई, विवाह में विलंब या दो बार होने वाले आयोजनों से जोड़ा जाता है। किंतु सप्तम भाव, शुक्र और नवमांश की स्थिति अच्छी हो तो प्रभाव सीमित रहता है।

क्या पुनर्फू हमेशा अशुभ है?

नहीं। यह धैर्य और पुनर्प्रयास सिखाने वाला योग है। कई मामलों में दूसरा प्रयास पहले से बेहतर परिणाम देता है — योग का स्वभाव पुनरावृत्ति है, विनाश नहीं।

यह कैलकुलेटर क्या-क्या जाँचता है?

तीनों शास्त्रीय शर्तें: शनि-चंद्र की सप्तम भाव में युति, दोनों की परस्पर सप्तम स्थिति, और चंद्र-शनि नक्षत्रों का परस्पर विनिमय। जो शर्त बनती है, वह परिणाम में स्पष्ट बताई जाती है।

पुनर्फू योग के उपाय क्या हैं?

शनि और चंद्रमा की शांति — सोमवार/शनिवार व्रत, शिव-उपासना और चंद्र-शनि मंत्र परंपरागत उपाय हैं। बड़े निर्णयों में जल्दबाज़ी न करना ही इस योग का व्यावहारिक उपाय है।