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कृशांग योग कैलकुलेटर

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृशांग योग क्या है?

कृशांग योग एक शरीर-संबंधी वैदिक ज्योतिष योग है, जो दुबले, पतले या शुष्क शरीर की प्रवृत्ति से जुड़ा है। इसका अर्थ स्वतः खराब स्वास्थ्य नहीं होता, परंतु यह शारीरिक भार में कमी और अधिक पोषण व जीवनशक्ति की आवश्यकता को दर्शा सकता है।

जन्म कुंडली में कृशांग योग कैसे बनता है?

एक शास्त्रीय रूप के अनुसार कृशांग योग तब बनता है जब लग्नेश किसी शुष्क राशि जैसे मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या या धनु में स्थित हो। एक अधिक व्यावहारिक रूप यह जाँचता है कि क्या नवांश लग्न किसी शुष्क ग्रह के स्वामित्व में है और क्या लग्न किसी पापग्रह से युत या दृष्ट है।

यह कैलकुलेटर कृशांग योग की जाँच कैसे करता है?

यह कैलकुलेटर कृशांग योग के स्वीकृत निर्माण नियमों की जाँच करता है, जिसमें शुष्क-राशि या शुष्क-ग्रह की शर्तें शामिल हैं, और फिर यह देखता है कि क्या लग्न को आवश्यक रूप में पापग्रह का प्रभाव प्राप्त होता है। यह यह भी जाँचता है कि क्या गुरु इस योग को रद्द करने वाला संरक्षण प्रदान करते हैं।

क्या कृशांग योग को रद्द या कम किया जा सकता है?

हाँ। यदि गुरु का लग्न या लग्नेश के साथ युति या दृष्टि संबंध हो, तो दुबलेपन या कृशता के परिणाम को रद्द या काफी हद तक कम माना जाता है। लग्न को शुभ ग्रहों का समर्थन मिलने से भी जीवनशक्ति में सुधार होता है और चरम प्रभाव कम होते हैं।

कृशांग योग को क्या और अधिक बिगाड़ सकता है?

यह योग तब अधिक कठोर प्रतीत हो सकता है जब देहकष्ट योग भी विद्यमान हो या जब शनि, सहायक बल के बिना सूखेपन, थकान अथवा तनाव को अधिक बढ़ा दे। ऐसी स्थितियों में स्वास्थ्य प्रबंधन अधिक संवेदनशील हो जाता है और अनुशासित दिनचर्या अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है।