ग्रहण योग कैलकुलेटर
ग्रहण योग तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा — कुंडली के दोनों प्रकाशमान ग्रह — राहु की निकट युति में आ जाते हैं, जैसे ग्रहण के समय आकाश में होता है। सूर्य-राहु की युति सूर्य ग्रहण योग और चंद्र-राहु की निकट युति चंद्र ग्रहण योग कहलाती है।
ग्रहण योग कैलकुलेटर के बारे में
सूर्य आत्मविश्वास, पिता और अधिकार का कारक है; चंद्रमा मन, माता और भावनाओं का। राहु की छाया इन पर पड़ने से संबंधित क्षेत्रों में अस्थिरता, भ्रम या छाया-भाव देखा जाता है। युति जितनी निकट (अंशों में), प्रभाव उतना गहरा।
FeelAstro का ग्रहण योग कैलकुलेटर अंशात्मक निकटता (15° के भीतर, समान राशि) के आधार पर सटीक जाँच करता है — केवल भाव-युति देखकर नहीं — और बताता है कि योग सूर्य से बना है या चंद्रमा से।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रहण योग क्या है?
सूर्य या चंद्रमा की राहु से निकट युति को ग्रहण योग कहते हैं। यह जन्मकालीन "ग्रहण-स्थिति" आत्मविश्वास (सूर्य) या मन (चंद्र) पर छाया का संकेत मानी जाती है।
क्या ग्रहण के दिन जन्म लेना ही ग्रहण योग है?
नहीं। योग कुंडली में सूर्य/चंद्र-राहु की अंशात्मक निकटता से बनता है, ग्रहण के दिन जन्म से नहीं। ग्रहण के दिन जन्मे कई लोगों की कुंडली में यह योग नहीं होता, और सामान्य दिनों में जन्मे कई लोगों में होता है।
सूर्य ग्रहण योग और चंद्र ग्रहण योग में क्या अंतर है?
सूर्य-राहु युति आत्मविश्वास, पिता-पक्ष और करियर-अधिकार को प्रभावित करती है; चंद्र-राहु युति मन, भावनात्मक स्थिरता और माता-पक्ष को। उपाय भी तदनुसार अलग होते हैं।
क्या ग्रहण योग वाले सफल नहीं होते?
होते हैं — राहु की छाया कल्पनाशीलता और अपरंपरागत सोच भी देती है। बलवान गुरु की दृष्टि या शुभ योगों का साथ हो तो यही योग विलक्षण उपलब्धियाँ दिला सकता है।
ग्रहण योग के उपाय क्या हैं?
सूर्य/चंद्र की शांति और राहु के मंत्र-दान परंपरागत उपाय हैं। आदित्य हृदय स्तोत्र (सूर्य) या शिव-उपासना (चंद्र) का विधान मिलता है। पूर्ण कुंडली देखकर ही उपाय चुनें।