योग
भद्र योग
भद्र बुध का महापुरुष योग है: तीक्ष्ण बुद्धि, वाक्पटुता और व्यावसायिक कुशाग्रता — ऐसा मन जो जिस भी विषय का अध्ययन करे, उसी से लाभ कमा ले।
देखें कि भद्र योग आपकी जन्म कुंडली में कहाँ स्थित है — किस राशि, भाव और नक्षत्र में।
भद्र बुध का महापुरुष योग है: तीक्ष्ण बुद्धि, वाक्पटुता और व्यावसायिक कुशाग्रता — ऐसा मन जो जिस भी विषय का अध्ययन करे, उसी से लाभ कमा ले।
लग्न से केंद्र में स्वराशि या उच्च राशि (मिथुन या कन्या) में स्थित बुध भद्र योग बनाते हैं — विद्या, बुद्धिमत्ता, बुद्धि से धन-प्राप्ति और चिरस्मरणीय यश।
— Phaladeepika pañca mahāpuruṣa yogas
निर्माण: बुध स्वराशिस्थ अथवा उच्चस्थ होकर 1, 4, 7 अथवा 10वें भाव में स्थित हों। अस्तंगत होना पहली जांच है — अस्तंगत बुध उसी विवेक-शक्ति को क्षीण कर देता है जिसका वचन भद्र योग देता है; बल-गणना इसी को दर्शाती है।
आपकी स्थिति ऊपर दिए गए भाग में दर्शाई गई है: यह बताती है कि भद्र योग आपकी कुंडली में कहाँ है और प्रत्येक शब्द को उसके पृष्ठ से जोड़ती है।
व्याख्या — कि यह स्थिति आपके जीवन और समय के लिए क्या अर्थ रखती है — आपकी व्यक्तिगत फलादेश का विषय है, न कि इस संदर्भ पुस्तकालय का।