Nakṣatra
श्रवण
श्रवण बाईसवाँ नक्षत्र है, जो मकर राशि के मध्य में स्थित है। इसका नाम 'सुनना' दर्शाता है: सुनकर सीखना, ज्ञान को सहेजना और दूर-दूर के लोगों को आपस में ज...
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श्रवण बाईसवाँ नक्षत्र है, जो मकर राशि के मध्य में स्थित है। इसका नाम 'सुनना' दर्शाता है: सुनकर सीखना, ज्ञान को सहेजना और दूर-दूर के लोगों को आपस में जोड़ना। इसके अंतर्गत जन्मे लोग अक्सर सुव्यवस्थित और गहन होते हैं, काम को अधूरा छोड़ना उनकी आदत नहीं होती और उनके पास ज्ञान का ऐसा भंडार होता है जो उनके लक्ष्यों को लगभग सुनिश्चित कर देता है; वे गहन श्रोता और परंपरा के संरक्षक होते हैं, हालाँकि यही ज्ञान कभी-कभी चतुराई या स्वार्थ की दिशा में भी मोड़ा जा सकता है। कान इसका प्रतीक है — सुनकर अर्जित की गई और आगे सौंपी गई बुद्धि।
<p>इस नक्षत्र के अधिष्ठाता <strong>विष्णु</strong> हैं, जिनका प्रतीक कान (या तीन पग-चिह्न) है — पालनकर्ता के तीन पग। इसके विंशोत्तरी स्वामी <em>चंद्र</em> हैं।</p>
— Brihat Parashara Hora Shastra daśā adhyāya (Vimśottarī lords)
विस्तार 10°00′–23°20′ मकर; स्वामी चंद्र, शनि की राशि में — ग्रहणशील भाव जो परंपरा और शिक्षण में संगठित होता है। इसके पद मेष से कर्क नवांशों में पड़ते हैं।
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