भाव
षष्ठ भाव
षष्ठ भाव उन बाधाओं पर शासन करता है जिनसे संघर्ष करके पार होना पड़ता है: बीमारी, ऋण, शत्रु, सेवा और दैनिक श्रम। यह एक कठिन भाव है जो प्रयास का फल देता...
देखें कि षष्ठ भाव आपकी जन्म कुंडली में कहाँ स्थित है — किस राशि, भाव और नक्षत्र में।
षष्ठ भाव उन बाधाओं पर शासन करता है जिनसे संघर्ष करके पार होना पड़ता है: बीमारी, ऋण, शत्रु, सेवा और दैनिक श्रम। यह एक कठिन भाव है जो प्रयास का फल देता है — यहाँ के संघर्ष वह शक्ति निर्मित करते हैं जिसे कुंडली आगे उपयोग में लाती है।
पराशर रिपु (अरि) भाव को शत्रु, रोग, घाव, मातृ संबंधी और सेवाकार्य का कारक मानते हैं। यह एक दुस्थान होते हुए भी उपचय भाव है: यहाँ स्थित पापग्रह अपने द्वारा सूचित शत्रुओं और रोगों को पराजित करते हैं, जबकि यहाँ बैठा शुभ ग्रह भोग के बजाय रक्षा में व्यय हो जाता है।
— Brihat Parashara Hora Shastra bhāva considerations
मंगल (मुकदमेबाजी, घाव) और शनि (दीर्घकालिक रोग, सेवा) संयुक्त रूप से इस भाव के कारक हैं। यह दोहरा स्वभाव आकलन को निर्धारित करता है: यहाँ स्थित पापग्रह शत्रुओं और रोग के विरुद्ध बल के रूप में गिने जाते हैं, परंतु षष्ठ भाव के स्वामी की अन्यत्र स्थिति यह दर्शाती है कि कुंडली में संघर्ष और ऋण किस दिशा में प्रवाहित होते हैं। स्वास्थ्य विश्लेषण में षष्ठ भाव को प्रथम, अष्टम और द्वादश भाव के साथ पारंपरिक स्वास्थ्य-चतुष्क के रूप में देखा जाता है; प्रमुख भावेशों के बीच षडाष्टक (6-8) संबंध उस घर्षण का संकेत देते हैं जिसका दशा-अंतर्दशा के समय सम्मान करना आवश्यक है।
आपकी स्थिति ऊपर दिए गए भाग में दर्शाई गई है: यह बताती है कि षष्ठ भाव आपकी कुंडली में कहाँ है और प्रत्येक शब्द को उसके पृष्ठ से जोड़ती है।
व्याख्या — कि यह स्थिति आपके जीवन और समय के लिए क्या अर्थ रखती है — आपकी व्यक्तिगत फलादेश का विषय है, न कि इस संदर्भ पुस्तकालय का।