Yoga
मालव्य योग
मालव्य शुक्र का महापुरुष योग है: परिष्कार, कलात्मक प्रतिभा, सुख-सुविधाएँ और आकर्षण — एक ऐसा जीवन जिसमें सौंदर्य बुना हुआ हो।
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मालव्य शुक्र का महापुरुष योग है: परिष्कार, कलात्मक प्रतिभा, सुख-सुविधाएँ और आकर्षण — एक ऐसा जीवन जिसमें सौंदर्य बुना हुआ हो।
लग्न से केंद्र में शुक्र स्वयं की राशि या उच्च राशि (वृषभ, तुला या मीन) में हो तो मालव्य योग बनता है — रूप, वाहन और विलासिता की सुंदरता, कलात्मक निपुणता, और एक सुखद दांपत्य।
— Phaladeepika pañca mahāpuruṣa yogas
निर्माण: शुक्र स्वराशि या उच्च का होकर प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में हो। राहु-केतु का संपर्क या दोनों ओर से घिरा होना इसके प्रभाव को कम करता है; विवाह-विश्लेषण में एक सशक्त मालव्य शुक्र सप्तम भाव के सशक्त कारक के रूप में भी कार्य करता है।
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