योग
भारती योग
भारती विद्या और सौभाग्य का योग है — ज्ञान के माध्यम से अर्जित विद्वत्ता, वाकपटुता और सम्मान।
देखें कि भारती योग आपकी जन्म कुंडली में कहाँ स्थित है — किस राशि, भाव और नक्षत्र में।
भारती विद्या और सौभाग्य का योग है — ज्ञान के माध्यम से अर्जित विद्वत्ता, वाकपटुता और सम्मान।
जब द्वितीय, पंचम या एकादश भाव के स्वामी का नवांश स्वामी नवम भाव के स्वामी के भाव में स्थित हो और स्वयं उच्च का हो, तो वाणी की देवी कुंडली को विद्या और सम्मानित उपलब्धि से अनुग्रहित करती हैं।
— Three Hundred Important Combinations the yogas of learning
निर्माण: द्वितीय/पंचम/एकादश भाव के स्वामी का नवांश (D9) स्वामी नवम-भाव-स्वामी के भाव में स्थित होकर उच्च का होता है। यह वर्ग (नवांश) स्थिति पर आधारित है, इसलिए यह मंच इसे लग्न कुंडली (D1) के भाव स्वामियों के साथ नवांश कुंडली (D9) से निकालता है।
आपकी स्थिति ऊपर दिए गए भाग में दर्शाई गई है: यह बताती है कि भारती योग आपकी कुंडली में कहाँ है और प्रत्येक शब्द को उसके पृष्ठ से जोड़ती है।
व्याख्या — कि यह स्थिति आपके जीवन और समय के लिए क्या अर्थ रखती है — आपकी व्यक्तिगत फलादेश का विषय है, न कि इस संदर्भ पुस्तकालय का।